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जो कार्य निशवारथ भाव से किया जाये

जो कार्य निशवारथ भाव से किया जाये बह कार्य ओर उसकी शोभा मालिक स्वमं कराते है ।

कराने वाला "मालिक"है ओर बह सब कुझ देख रहा है  बह चुनता है किससे कया कराना है ।

सब उनकी ही क्रपा दया महिर से हो रहा है
देने बाला देत है देता है दिन रैन ।।दाता अबगत एक ।।